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पत्नी के गहनों पर पति की आय में जोड़ अनुचित: नागपुर ITAT ने दी राहत

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साझा घर में मिले आभूषणों का वास्तविक स्वामित्व पत्नी का हो, तो केवल बरामदगी के आधार पर उनका मूल्य पति की अघोषित आय में नहीं जोड़ा जा सकता। नागपुर आयकर अपीलीय अधिकरण ने निर्मल कुमार अग्रवाल बनाम ACIT , निर्धारण वर्ष 2017-18 में यह निर्णय दिया। तलाशी के बाद आकलन अधिकारी ने ₹50 लाख की आय वृद्धि की थी। प्रथम अपील में राहत मिलने के बावजूद चार आभूषणों से संबंधित ₹3,86,186 की वृद्धि कायम रही। ट्रिब्यूनल ने पाया कि इनमें ₹2,57,615 के आभूषण पत्नी के थे, जिन्हें उनके माता-पिता ने बेटियों के जन्म पर उपहार दिया था। पति द्वारा इनकी खरीद में निवेश का प्रमाण नहीं था। पति के आभूषणों में 72.6 ग्राम की खरीद बैंक और लेखा रिकॉर्ड से प्रमाणित थी। शेष 48.9 ग्राम पर पारिवारिक परंपराओं और CBDT निर्देश संख्या 1916 को ध्यान में रखते हुए राहत मिली। ट्रिब्यूनल ने हीरे जड़े होने या पुरुष के स्वामित्व में होने को आभूषण अस्वीकार करने का पर्याप्त आधार नहीं माना। पूरी ₹3,86,186 की वृद्धि हटा दी गई। इसी मामले में संशोधन से पहले हुई तलाशी पर धारा 115BBE की बढ़ी हुई 60% दर लगाने की चुनौती भी स्वीकार हुई। स्रोत: TaxGuru प...

गलतियों से सीखने की शुरुआत उन्हें स्वीकार करने से होती है

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  “गलतियों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है, बशर्ते उन्हें मानने से इनकार न करें।” जीवन में हम सभी से गलतियाँ होती हैं। कभी जल्दबाजी में लिया गया निर्णय परेशानी बढ़ा देता है, कभी बिना सोचे बोले गए शब्द किसी अपने को दुख पहुँचा देते हैं। हम चाहते हैं कि सब कुछ सही हो, लेकिन हमारी समझ और अनुभव की अपनी सीमाएँ होती हैं। ऐसे में आगे बढ़ने के लिए यह देखना जरूरी है कि गलती होने के बाद हम क्या करते हैं। अपनी गलती स्वीकार करना सुधार की पहली सीढ़ी है। जब तक हम यह मानने को तैयार नहीं होते कि हमसे कहीं चूक हुई है, तब तक उसे ठीक करने का रास्ता भी नहीं खोज पाते। गलती मानना इतना कठिन क्यों लगता है? अक्सर हमें डर होता है कि गलती स्वीकार करने से लोग हमें कमजोर या अयोग्य समझेंगे। इसलिए हम सफाई देने लगते हैं, परिस्थितियों को दोष देते हैं या जिम्मेदारी किसी दूसरे पर डाल देते हैं। इससे थोड़ी देर के लिए मन को राहत मिल सकती है, लेकिन समस्या बनी रहती है। “हाँ, यहाँ मुझसे गलती हुई” कहना साहस माँगता है। यह स्वीकार करने में विनम्रता भी है कि हमारी हर बात सही नहीं हो सकती और हमें अभी बहुत कुछ सीखना है। अनुभव तभी स...

EPFO की नई वेतन सीमा का आप पर क्या असर होगा?

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Tax Audit Due Date FY 2025-26 An extension is possible, but it is not confirmed yet.

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  An extension is possible, but it is not confirmed. Assuming you mean India’s FY 2025–26 (AY 2026–27) , as of 21 September 2026 , I could not find an official CBDT extension announcement. Current deadline: The usual tax-audit report deadline remains 30 September 2026 . Income Tax Department FAQ Requests for extension: CA associations have requested 31 October 2026 , citing utility updates, portal difficulties and overlapping compliance work. These are requests, not an approved extension. Representation dated 14 September My assessment: There are grounds for an extension, but insufficient evidence to call it likely or assign a reliable percentage. Continue preparing to file by 30 September , unless CBDT formally changes the date. For cases requiring a transfer-pricing report under section 92E, the normal tax-audit deadline is 31 October 2026. Official filing FAQs #TaxAudit #TaxAuditDueDate #TaxAuditExtension #DueDateExtension #FY202526 #AY202627 #CBDT #IncomeTaxIndia #Chartere...

एक बार और प्रयास: सफलता की ओर बढ़ता कदम

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जीवन में कई बार ऐसा होता है कि हम पूरी मेहनत करते हैं, फिर भी परिणाम हमारी उम्मीदों के अनुसार नहीं आते। परीक्षा में मनचाहे अंक नहीं मिलते, नौकरी की तलाश लंबी हो जाती है या व्यवसाय में अपेक्षित प्रगति नहीं होती। ऐसे समय में निराश होना स्वाभाविक है। लेकिन यही वह मोड़ है, जहाँ हमारा अगला निर्णय हमारी आगे की यात्रा को प्रभावित करता है। “सबसे बड़ी कमजोरी हार मानना है।” यह सुविचार हमें कठिन समय में अपने प्रयासों का मूल्य याद दिलाता है। एक असफल परिणाम हमारी पूरी क्षमता का आकलन नहीं कर सकता। उससे हमें यह समझने का अवसर मिलता है कि कहाँ तैयारी अधूरी थी, किस निर्णय में सुधार की जरूरत है और अगला कदम कैसे बेहतर बनाया जा सकता है। सफलता की दिशा में “एक बार और प्रयास” करने का अर्थ है—अपने अनुभव से सीखकर आगे बढ़ना। यदि कोई तरीका अपेक्षित परिणाम नहीं दे रहा है, तो उसकी समीक्षा करना उपयोगी है। कभी हमें अपनी योजना बदलनी होती है, कभी किसी अनुभवी व्यक्ति से सलाह लेनी होती है और कभी कोई नया कौशल सीखना पड़ता है। सोच-समझकर किया गया अगला प्रयास हमारी तैयारी को मजबूत बनाता है। मान लीजिए, किसी व्यक्ति ने एक छोटी ...

EPFO में बड़ा बदलाव: वेतन सीमा ₹25,000 हुई, आपकी नौकरी और PF पर क्या असर?

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नौकरीपेशा कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने वाला बड़ा बदलाव सामने आया है। EPFO के अंतर्गत अनिवार्य कवरेज की मासिक वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दी गई है। नई सीमा 17 सितंबर 2026 से प्रभावी बताई गई है। समाचार रिपोर्ट श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की साझा राजपत्र अधिसूचना S.O. 5109(E), दिनांक 17 सितंबर 2026 के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अध्याय III के लिए यह सीमा निर्धारित की गई है। अधिसूचना इसे राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से लागू करती है। इस बदलाव से EPFO के दायरे में आने वाले प्रतिष्ठानों में ₹15,000 से अधिक और ₹25,000 तक की पात्र मासिक wages वाले अधिक कर्मचारी अनिवार्य कवरेज में आ सकेंगे। उन्हें लागू पात्रता और योजना नियमों के अनुसार भविष्य निधि, पेंशन और बीमा सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा। कवरेज का विवरण कर्मचारियों को अपने HR या Accounts विभाग से PF पात्रता और वेतन से होने वाली कटौती समझनी चाहिए। नियोक्ताओं को कर्मचारियों की कवरेज, पंजीकरण और payroll गणना की समीक्षा करनी चाहिए। ध्यान दें: ₹25,000 की सीमा को सीधे CTC या हाथ में मिलने वाली सैलरी से न जोड़े...

EPFO की वेतन सीमा बढ़ी: कर्मचारियों को सुरक्षा, MSMEs के लिए बढ़ी जिम्मेदारी | EPFO सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000

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  केंद्रीय मंत्रिमंडल ने EPFO के अनिवार्य कवरेज की मासिक वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने को मंजूरी दी है। सरकार के अनुसार, इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की उम्मीद है। पीआईबी की घोषणा सरकारी घोषणा के मुताबिक, यह बदलाव 17 सितंबर 2026 से प्रभावी है। पात्र कर्मचारियों को लागू नियमों के अनुसार भविष्य निधि, पेंशन और बीमा योजनाओं का लाभ मिलेगा। इससे सेवानिवृत्ति के लिए बचत और परिवार की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय व्यावसायिक दृष्टि से देखें तो व्यापक कवरेज के कारण नियोक्ता अंशदान और वेतन प्रबंधन की लागत बढ़ सकती है। खासकर सीमित संसाधनों वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को नए पात्र कर्मचारियों का पंजीकरण, रिकॉर्ड अद्यतन और समय पर अंशदान जमा करने के लिए अतिरिक्त तैयारी करनी होगी। वास्तविक वित्तीय असर उनकी मौजूदा व्यवस्था और लागू नियमों पर निर्भर करेगा। कर्मचारियों के लिए भी दीर्घकालीन बचत के साथ तत्काल बजट का पहलू जुड़ा है—जहाँ नया या अधिक कर्मचारी अंशदान कटेगा, वहाँ हाथ में मिलने वाला वेतन घट सकत...