How to Control Anger: भगवद्गीता से सीखें क्रोध पर नियंत्रण की कला
क्रोध एक स्वाभाविक मानवीय भावना है। किसी के गलत व्यवहार, अपमान, असफलता, अन्याय या अपनी इच्छा पूरी न होने पर हमें गुस्सा आ सकता है। लेकिन जब क्रोध हमारे विचारों, शब्दों और निर्णयों पर नियंत्रण कर लेता है, तब वह हमारे लिए विनाशकारी बन जाता है। क्रोध में व्यक्ति अक्सर ऐसी बातें बोल देता है जिनका उसे बाद में पछतावा होता है। कई बार कुछ मिनटों का गुस्सा वर्षों पुराने रिश्तों, प्रतिष्ठा, व्यवसाय और मानसिक शांति को नुकसान पहुँचा देता है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने क्रोध के जन्म, उसके दुष्परिणाम और उससे मुक्ति का अत्यंत गहरा मनोवैज्ञानिक ज्ञान दिया है। क्रोध की शुरुआत कहाँ से होती है? भगवद्गीता के अध्याय 2, श्लोक 62–63 में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि जब मनुष्य किसी विषय या वस्तु का बार-बार चिंतन करता है, तो उससे आसक्ति उत्पन्न होती है। आसक्ति से इच्छा पैदा होती है और इच्छा में बाधा आने पर क्रोध उत्पन्न होता है। इस प्रक्रिया को सरल रूप में समझें: विषय-चिंतन → आसक्ति → इच्छा → इच्छा में बाधा → क्रोध → भ्रम → बुद्धि का नाश → पतन अर्थात क्रोध अचानक पैदा नहीं होता। उसके पीछे कोई अपेक्ष...