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Tax Audit Due Date FY 2025-26 An extension is possible, but it is not confirmed yet.
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An extension is possible, but it is not confirmed. Assuming you mean India’s FY 2025–26 (AY 2026–27) , as of 21 September 2026 , I could not find an official CBDT extension announcement. Current deadline: The usual tax-audit report deadline remains 30 September 2026 . Income Tax Department FAQ Requests for extension: CA associations have requested 31 October 2026 , citing utility updates, portal difficulties and overlapping compliance work. These are requests, not an approved extension. Representation dated 14 September My assessment: There are grounds for an extension, but insufficient evidence to call it likely or assign a reliable percentage. Continue preparing to file by 30 September , unless CBDT formally changes the date. For cases requiring a transfer-pricing report under section 92E, the normal tax-audit deadline is 31 October 2026. Official filing FAQs #TaxAudit #TaxAuditDueDate #TaxAuditExtension #DueDateExtension #FY202526 #AY202627 #CBDT #IncomeTaxIndia #Chartere...
एक बार और प्रयास: सफलता की ओर बढ़ता कदम
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जीवन में कई बार ऐसा होता है कि हम पूरी मेहनत करते हैं, फिर भी परिणाम हमारी उम्मीदों के अनुसार नहीं आते। परीक्षा में मनचाहे अंक नहीं मिलते, नौकरी की तलाश लंबी हो जाती है या व्यवसाय में अपेक्षित प्रगति नहीं होती। ऐसे समय में निराश होना स्वाभाविक है। लेकिन यही वह मोड़ है, जहाँ हमारा अगला निर्णय हमारी आगे की यात्रा को प्रभावित करता है। “सबसे बड़ी कमजोरी हार मानना है।” यह सुविचार हमें कठिन समय में अपने प्रयासों का मूल्य याद दिलाता है। एक असफल परिणाम हमारी पूरी क्षमता का आकलन नहीं कर सकता। उससे हमें यह समझने का अवसर मिलता है कि कहाँ तैयारी अधूरी थी, किस निर्णय में सुधार की जरूरत है और अगला कदम कैसे बेहतर बनाया जा सकता है। सफलता की दिशा में “एक बार और प्रयास” करने का अर्थ है—अपने अनुभव से सीखकर आगे बढ़ना। यदि कोई तरीका अपेक्षित परिणाम नहीं दे रहा है, तो उसकी समीक्षा करना उपयोगी है। कभी हमें अपनी योजना बदलनी होती है, कभी किसी अनुभवी व्यक्ति से सलाह लेनी होती है और कभी कोई नया कौशल सीखना पड़ता है। सोच-समझकर किया गया अगला प्रयास हमारी तैयारी को मजबूत बनाता है। मान लीजिए, किसी व्यक्ति ने एक छोटी ...
EPFO में बड़ा बदलाव: वेतन सीमा ₹25,000 हुई, आपकी नौकरी और PF पर क्या असर?
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नौकरीपेशा कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने वाला बड़ा बदलाव सामने आया है। EPFO के अंतर्गत अनिवार्य कवरेज की मासिक वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दी गई है। नई सीमा 17 सितंबर 2026 से प्रभावी बताई गई है। समाचार रिपोर्ट श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की साझा राजपत्र अधिसूचना S.O. 5109(E), दिनांक 17 सितंबर 2026 के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अध्याय III के लिए यह सीमा निर्धारित की गई है। अधिसूचना इसे राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से लागू करती है। इस बदलाव से EPFO के दायरे में आने वाले प्रतिष्ठानों में ₹15,000 से अधिक और ₹25,000 तक की पात्र मासिक wages वाले अधिक कर्मचारी अनिवार्य कवरेज में आ सकेंगे। उन्हें लागू पात्रता और योजना नियमों के अनुसार भविष्य निधि, पेंशन और बीमा सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा। कवरेज का विवरण कर्मचारियों को अपने HR या Accounts विभाग से PF पात्रता और वेतन से होने वाली कटौती समझनी चाहिए। नियोक्ताओं को कर्मचारियों की कवरेज, पंजीकरण और payroll गणना की समीक्षा करनी चाहिए। ध्यान दें: ₹25,000 की सीमा को सीधे CTC या हाथ में मिलने वाली सैलरी से न जोड़े...
EPFO की वेतन सीमा बढ़ी: कर्मचारियों को सुरक्षा, MSMEs के लिए बढ़ी जिम्मेदारी | EPFO सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने EPFO के अनिवार्य कवरेज की मासिक वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने को मंजूरी दी है। सरकार के अनुसार, इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की उम्मीद है। पीआईबी की घोषणा सरकारी घोषणा के मुताबिक, यह बदलाव 17 सितंबर 2026 से प्रभावी है। पात्र कर्मचारियों को लागू नियमों के अनुसार भविष्य निधि, पेंशन और बीमा योजनाओं का लाभ मिलेगा। इससे सेवानिवृत्ति के लिए बचत और परिवार की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय व्यावसायिक दृष्टि से देखें तो व्यापक कवरेज के कारण नियोक्ता अंशदान और वेतन प्रबंधन की लागत बढ़ सकती है। खासकर सीमित संसाधनों वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को नए पात्र कर्मचारियों का पंजीकरण, रिकॉर्ड अद्यतन और समय पर अंशदान जमा करने के लिए अतिरिक्त तैयारी करनी होगी। वास्तविक वित्तीय असर उनकी मौजूदा व्यवस्था और लागू नियमों पर निर्भर करेगा। कर्मचारियों के लिए भी दीर्घकालीन बचत के साथ तत्काल बजट का पहलू जुड़ा है—जहाँ नया या अधिक कर्मचारी अंशदान कटेगा, वहाँ हाथ में मिलने वाला वेतन घट सकत...
Tax Audit: Understanding the Shift from Penalty to Late Fee
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India’s tax audit framework is changing, and taxpayers need to distinguish between the rules for FY 2025–26 and those for Tax Year 2026–27 onwards. For FY 2025–26 (AY 2026–27) , tax audits continue under Section 44AB of the Income-tax Act, 1961 , using Form 3CA or 3CB along with Form 3CD. These requirements apply even when the report is filed after 1 April 2026. The image’s reference to “Section 444B” is a typographical error. Income Tax Department FAQs Failure to comply may attract a penalty under Section 271B of 0.5% of sales, turnover or gross receipts, capped at ₹1,50,000 . However, Section 273B provides relief where the taxpayer proves reasonable cause for the failure. Section 271B , Section 273B For Tax Year 2026–27 onwards , tax audits fall under Section 63 of the Income-tax Act, 2025 , with the consolidated Form No. 26 replacing the earlier forms. Official Form 26 FAQs Under Section 428(c) , the consequence becomes a fixed fee: ₹75,000 for a delay up to one month and ₹1,50,000...