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माफ करें, बीती बातों को छोड़ें और आगे बढ़ें “Forgive, Forget and Move On”

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  समुद्र के किनारे एक घुमावदार सड़क, ढलते सूरज की सुनहरी रोशनी और दूर तक फैला आसमान—इस तस्वीर में ठहराव भी है और आगे की यात्रा का संकेत भी। इसके बीच लिखा संदेश, “Forgive, Forget and Move On” , हमें अपने जीवन के उन अनुभवों के बारे में सोचने को कहता है जिन्हें हम पीछे छोड़ना चाहते हैं, लेकिन छोड़ नहीं पाते। कभी किसी की कही बात मन में रह जाती है। कभी टूटे रिश्ते, अधूरी उम्मीदें या अपने ही फैसले बार-बार याद आते हैं। बीता हुआ समय बदलना हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन उसके साथ आगे कैसे जीना है, इसमें हमारी भूमिका जरूर है। माफ करने के लिए खुद को समय दें जिसने दुख पहुँचाया हो, उसे माफ करना आसान नहीं होता। कई बार हम समझ भी नहीं पाते कि सामने वाले के व्यवहार से ज्यादा तकलीफ हुई या उससे जुड़ी अपनी उम्मीदों के टूटने से। क्षमा की शुरुआत इस बात को स्वीकार करने से हो सकती है कि हमें चोट लगी है। अपनी भावनाओं को छोटा बताने या तुरंत सामान्य होने का दबाव बनाने की जरूरत नहीं। माफ करने का फैसला आपका है और उसका समय भी। किसी को माफ करने के बाद भी आप उससे दूरी रख सकते हैं। भरोसा दोबारा बनने के लिए व्यवहार मे...

मध्यप्रदेश वृत्तिकर 2026-27: 30 सितंबर की समयसीमा वाली खबर, जानें सरकारी प्रावधान

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मध्यप्रदेश में वित्तीय वर्ष 2026-27 के वृत्तिकर यानी प्रोफेशनल टैक्स को लेकर करदाताओं के लिए एक जरूरी खबर सामने आई है। शिवपुरी से संबंधित उपलब्ध समाचार-कतरन में वृत्तिकर जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 बताई गई है। खबर में संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों से समय पर भुगतान करने को कहा गया है, ताकि पेनाल्टी और वसूली की कार्रवाई से बचा जा सके। सरकारी दस्तावेज में क्या लिखा है? मध्यप्रदेश वाणिज्यिक कर विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध वृत्तिकर अधिनियम के पाठ की धारा 12(3) में नियोक्ताओं से अलग श्रेणी के व्यक्तियों के वार्षिक भुगतान का प्रावधान है। वर्ष शुरू होने से पहले या 31 अगस्त तक पंजीकृत व्यक्तियों के लिए अंग्रेजी पाठ में “Before 30th September” लिखा है। 31 अगस्त के बाद पंजीकृत व्यक्तियों के लिए पंजीकरण की तारीख से 30 दिन के भीतर भुगतान का उल्लेख है। आधिकारिक अधिनियम एवं नियम PDF इसलिए समाचार में लिखे “30 सितंबर तक” और उपलब्ध अधिनियम के अंग्रेजी पाठ में लिखे “30 सितंबर से पहले” के अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है। साथ ही, इस वार्षिक समयसीमा को सभी नियोक्ताओं और कर्मचारियों की कर-कटौती पर ...

हर नई सीख के लिए तैयार रहें: सीखना ही हमें सक्षम बनाता है

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  “हर नई सीख के लिए तैयार रहें, क्योंकि सीखना ही हमें ज्यादा सक्षम बनाता है ।” यह सुविचार हमें याद दिलाता है कि सीखना केवल स्कूल, कॉलेज या किसी परीक्षा तक सीमित नहीं है। रोज़मर्रा का जीवन भी हमें कुछ नया समझने का अवसर देता है। कभी किसी से बातचीत करके, कभी कोई काम पहली बार करके और कभी अपनी गलती पर विचार करके हम आगे बढ़ते हैं। अक्सर हम परिचित कामों में सहज महसूस करते हैं। कुछ नया सीखने की बात आती है, तो मन में सवाल उठते हैं—क्या मैं यह कर पाऊँगा? कहीं मुझसे गलती तो नहीं होगी? शुरुआत में ऐसी झिझक स्वाभाविक है। लेकिन यदि हम पूरी तरह तैयार होने का इंतज़ार करते रहें, तो पहला कदम उठाना मुश्किल हो जाता है। कई बार समझ और आत्मविश्वास शुरुआत करने के बाद ही आते हैं। मान लीजिए, आपको मोबाइल पर कोई ज़रूरी काम करना नहीं आता। पहली बार किसी की मदद लेनी पड़ सकती है। दूसरी बार भी कुछ चरण भूल सकते हैं। मगर अभ्यास करते हुए वही काम धीरे-धीरे आसान होने लगता है। यह छोटी-सी सीख भी आपको अपने काम स्वयं करने में अधिक सक्षम बना सकती है। सीखने के लिए यह स्वीकार करना ज़रूरी है कि हमें सब कुछ नहीं आता। सवाल पूछना,...

GST विवादों की समझ होगी आसान: GSTAT का पहला E-Journal, महत्वपूर्ण फैसलों तक डिजिटल पहुँच

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  GST विवादों की समझ होगी आसान: GSTAT का पहला ई-जर्नल, महत्वपूर्ण फैसलों तक डिजिटल पहुँच जीएसटी से जुड़े विवादों और न्यायिक निर्णयों को समझने वाले करदाताओं तथा टैक्स प्रोफेशनल्स के लिए GSTAT E-Journal का प्रथम खंड—Volume I एक उपयोगी संदर्भ सामग्री है। इसमें वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय अधिकरण (Goods and Services Tax Appellate Tribunal) के 31 अगस्त 2026 तक के निर्णयों की रिपोर्टिंग शामिल है। इस प्रकाशन के माध्यम से पाठक अधिकरण के फैसलों का अध्ययन कर सकते हैं और समझ सकते हैं कि संबंधित मामलों में तथ्यों तथा कानूनी प्रावधानों की व्याख्या किस प्रकार की गई है। आधिकारिक ई-जर्नल यहाँ पढ़ें। टैक्स प्रोफेशनल्स और कारोबारियों के लिए क्यों उपयोगी है यह ई-जर्नल? जीएसटी अनुपालन के साथ विवादों से जुड़े निर्णयों की जानकारी रखना भी महत्वपूर्ण है। किसी फैसले का अध्ययन संबंधित कानूनी प्रश्न, पक्षकारों के तर्क और अधिकरण के निष्कर्ष को समझने में सहायता करता है। यह ई-जर्नल विशेष रूप से इन पाठकों के लिए उपयोगी हो सकता है: चार्टर्ड अकाउंटेंट और टैक्स कंसल्टेंट: संबंधित निर्णयों के अध्ययन और पेशेवर शोध के...

PF Contribution for September 2026: Calculation for an Employee Earning ₹20,000 per Month

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PF Contribution for September 2026: Calculation for an Employee Earning ₹20,000 per Month September 2026 requires a split-period PF calculation because the statutory wage ceiling increased from ₹15,000 to ₹25,000 with effect from 17 September 2026 . For an employee earning ₹20,000 in monthly PF wages, the second period’s calculation uses their actual wages of ₹20,000. Source: Government announcement ₹20,000 is therefore the employee’s applicable monthly wage base in this example—not the revised statutory ceiling. This illustration assumes the employee was already a PF member, has 30 contributory days in September, and contributions were previously restricted to the statutory ceiling. It uses the standard 12% contribution rate for both employee and employer. Source: EPFO contribution rates How the September contribution is calculated Particulars 1–16 September 17–30 September Number of days 16 14 Applicable monthly PF wage base ₹15,000 ₹20,000 Prorated PF wages ₹15,000 × 16 ÷ 30 = ₹8,0...

पत्नी के गहनों पर पति की आय में जोड़ अनुचित: नागपुर ITAT ने दी राहत

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साझा घर में मिले आभूषणों का वास्तविक स्वामित्व पत्नी का हो, तो केवल बरामदगी के आधार पर उनका मूल्य पति की अघोषित आय में नहीं जोड़ा जा सकता। नागपुर आयकर अपीलीय अधिकरण ने निर्मल कुमार अग्रवाल बनाम ACIT , निर्धारण वर्ष 2017-18 में यह निर्णय दिया। तलाशी के बाद आकलन अधिकारी ने ₹50 लाख की आय वृद्धि की थी। प्रथम अपील में राहत मिलने के बावजूद चार आभूषणों से संबंधित ₹3,86,186 की वृद्धि कायम रही। ट्रिब्यूनल ने पाया कि इनमें ₹2,57,615 के आभूषण पत्नी के थे, जिन्हें उनके माता-पिता ने बेटियों के जन्म पर उपहार दिया था। पति द्वारा इनकी खरीद में निवेश का प्रमाण नहीं था। पति के आभूषणों में 72.6 ग्राम की खरीद बैंक और लेखा रिकॉर्ड से प्रमाणित थी। शेष 48.9 ग्राम पर पारिवारिक परंपराओं और CBDT निर्देश संख्या 1916 को ध्यान में रखते हुए राहत मिली। ट्रिब्यूनल ने हीरे जड़े होने या पुरुष के स्वामित्व में होने को आभूषण अस्वीकार करने का पर्याप्त आधार नहीं माना। पूरी ₹3,86,186 की वृद्धि हटा दी गई। इसी मामले में संशोधन से पहले हुई तलाशी पर धारा 115BBE की बढ़ी हुई 60% दर लगाने की चुनौती भी स्वीकार हुई। स्रोत: TaxGuru प...

गलतियों से सीखने की शुरुआत उन्हें स्वीकार करने से होती है

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  “गलतियों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है, बशर्ते उन्हें मानने से इनकार न करें।” जीवन में हम सभी से गलतियाँ होती हैं। कभी जल्दबाजी में लिया गया निर्णय परेशानी बढ़ा देता है, कभी बिना सोचे बोले गए शब्द किसी अपने को दुख पहुँचा देते हैं। हम चाहते हैं कि सब कुछ सही हो, लेकिन हमारी समझ और अनुभव की अपनी सीमाएँ होती हैं। ऐसे में आगे बढ़ने के लिए यह देखना जरूरी है कि गलती होने के बाद हम क्या करते हैं। अपनी गलती स्वीकार करना सुधार की पहली सीढ़ी है। जब तक हम यह मानने को तैयार नहीं होते कि हमसे कहीं चूक हुई है, तब तक उसे ठीक करने का रास्ता भी नहीं खोज पाते। गलती मानना इतना कठिन क्यों लगता है? अक्सर हमें डर होता है कि गलती स्वीकार करने से लोग हमें कमजोर या अयोग्य समझेंगे। इसलिए हम सफाई देने लगते हैं, परिस्थितियों को दोष देते हैं या जिम्मेदारी किसी दूसरे पर डाल देते हैं। इससे थोड़ी देर के लिए मन को राहत मिल सकती है, लेकिन समस्या बनी रहती है। “हाँ, यहाँ मुझसे गलती हुई” कहना साहस माँगता है। यह स्वीकार करने में विनम्रता भी है कि हमारी हर बात सही नहीं हो सकती और हमें अभी बहुत कुछ सीखना है। अनुभव तभी स...