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Enabling Filing of Appeals in Cases Involving NIL or Zero Demand Amount – reg.

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Enabling Filing of Appeals in Cases Involving NIL or Zero Demand Amount – reg. Sep 7th, 2026 In cases where a dispute regarding liability exists but the demand amount is reflected as "NIL" or "Zero" in the demand order, and payment has been made by the taxpayer prior to the issuance of the demand order, the previous validation restricting the filing of an appeal against such demand orders has been removed from the GST Portal. Accordingly, taxpayers are now enabled to file an appeal in Form GST APL-01 against demand orders reflecting a NIL or Zero demand amount. Taxpayers facing the above issue may now file an appeal in Form GST APL-01 against such demand orders. In case of any query or difficulty while filing the appeal, taxpayers may raise a ticket with the GST Helpdesk for assistance. Thanks, Team GSTN Link :  https://www.gst.gov.in/newsandupdates/read/671 #GSTUpdate #GSTN #GSTPortal #GSTAppeal #GSTAPL01 #NILDemand #ZeroDemand #TaxpayerRights #GSTCompliance #GSTHe...

भगवान: भूमि, गगन, वायु, अग्नि और नीर में बसी जीवन की पवित्रता

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  ईश्वर के प्रति श्रद्धा हमें जीवन का सम्मान करना सिखाती है। यही श्रद्धा तब और सार्थक बनती है, जब हमारे व्यवहार में धरती, पानी, हवा और दूसरे जीवों के लिए संवेदना दिखाई दे। एक पौधे की देखभाल, पानी की बचत और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखना भी इस भावना को जीने के सुंदर तरीके हैं। भारत के जलपुरुष (Water Man of India) डॉ. राजेंद्र सिंह ने ‘भगवान’ शब्द को प्रकृति के पाँच तत्वों से जोड़कर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया है। उनके संबोधन में इस विचार का उल्लेख मिलता है। संदर्भ: अमर उजाला अक्षर तत्व भ भूमि ग गगन व वायु अ अग्नि न नीर यह प्रकृति और आस्था को जोड़ने वाली प्रतीकात्मक व्याख्या है। इससे प्रेरणा लेकर हम अपने जीवन और पर्यावरण के संबंध को अधिक संवेदनशीलता से समझ सकते हैं। 🌱 भूमि : हमें अन्न, आश्रय और जीवन का आधार देती है। जिस मिट्टी से हमारी थाली भरती है, उसकी देखभाल हमारी जिम्मेदारी है। जमीन पर कचरा न फैलाना, हरियाली की रक्षा कर...

“कानून की समझ, तर्क की ताकत और आज़ादी का सम्मान।”

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  “कानून की समझ, तर्क की ताकत और आज़ादी का सम्मान।” नमस्कार! स्वागत है आपका “Legal, Logic, Liberty — Talks by Sirji.com” में—एक ऐसा संवाद मंच, जहाँ हम कानून, समाज और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े सवालों पर खुलकर बात करेंगे। यहाँ Legal का अर्थ है अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझना। Logic का अर्थ है हर दावे को तथ्यों, प्रमाणों और विवेक की कसौटी पर परखना। और Liberty का अर्थ है सोचने, बोलने, सवाल उठाने और गरिमा के साथ जीने की स्वतंत्रता का सम्मान करना। अदालतों के फैसलों से लेकर रोजमर्रा की जिंदगी तक, संविधान से लेकर सामाजिक बदलाव तक—हम जटिल मुद्दों को सरल भाषा में समझेंगे और उनके अलग-अलग पक्षों पर विचार करेंगे। हमारी बातचीत में सवालों के लिए जगह होगी, असहमति का सम्मान होगा और विचारों का आधार तर्क होगा। उद्देश्य होगा ऐसी समझ विकसित करना, जिससे हम जागरूक नागरिक बनें और अपने फैसले सोच-समझकर ले सकें। आइए, सवाल पूछें, नजरिया व्यापक करें और संवाद को आगे बढ़ाएँ। यह है “Legal, Logic, Liberty — Talks by Sirji.com”। समझ कानून की। सोच तर्क की। आवाज़ आज़ादी की। #LegalLogicLiberty #TalksBySir...

चाँद तक पहुँचा भारत, फिर भी जाति की बेड़ियाँ क्यों? मैनुअल स्कैवेंजिंग पर बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

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  भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियाँ हमें गर्व से भर देती हैं। लेकिन इसी देश में जब किसी व्यक्ति को अपनी आजीविका के लिए अमानवीय परिस्थितियों में काम करना पड़ता है, तो हमारी प्रगति के सामने एक गंभीर सवाल खड़ा होता है—विकास का लाभ और सम्मान आखिर हर नागरिक तक कब पहुँचेगा? बॉम्बे हाईकोर्ट ने मैनुअल स्कैवेंजिंग की प्रथा जारी रहने पर महाराष्ट्र सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए इसी विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया। अदालत की टिप्पणी का आशय था कि हम चाँद तक पहुँचने पर गर्व करते हैं, जबकि जाति व्यवस्था आज भी कुछ नागरिकों को मानवीय गरिमा के विरुद्ध परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर करती है। न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजुषा देशपांडे की पीठ ने इस प्रथा के बने रहने और संबंधित कानूनों के कमजोर क्रियान्वयन पर चिंता जताई। स्रोत: लाइव लॉ इस खबर के साथ दिखाई गई तस्वीर हमें ठहरकर सोचने के लिए मजबूर करती है। सीवर के भीतर मौजूद व्यक्ति का दृश्य हमारे सामने उस श्रम को लाता है, जिसे शहरों की रोजमर्रा की सुविधा के बीच अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। साफ सड़कें और व्यवस्थित इमारतें देखकर संतुष्ट हो जाना ...

मानवता के लिए श्रीकृष्ण के 5 महान उपदेश

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  मानवता के लिए श्रीकृष्ण के 5 महान उपदेश कर्म करो, फल से आसक्ति मत रखो अपने कर्तव्य को पूरी ईमानदारी से करें, लेकिन परिणाम की चिंता में स्वयं को कमजोर न बनाएं। (गीता 2.47) सुख-दुःख में संतुलित रहें सफलता-असफलता, लाभ-हानि और मान-अपमान में मन को स्थिर रखना ही सच्चा योग है। (गीता 2.48) मन को अपना मित्र बनाएं नियंत्रित मन आपका सबसे बड़ा मित्र है, जबकि अनियंत्रित मन सबसे बड़ा शत्रु बन सकता है। (गीता 6.5–6.6) हर प्राणी को समान दृष्टि से देखें जाति, पद, धन या रूप के आधार पर भेदभाव न करें। प्रत्येक जीव में उसी परमात्मा का अंश देखें। (गीता 5.18) अहंकार छोड़कर ईश्वर पर विश्वास रखें भय, चिंता और अहंकार का त्याग करके श्रद्धा, प्रेम और समर्पण के साथ जीवन जिएँ। (गीता 18.66) सार: श्रीकृष्ण का संदेश है—कर्तव्य निभाओ, मन पर विजय पाओ, सभी से प्रेम करो, परिस्थितियों में संतुलित रहो और परमात्मा पर विश्वास रखो। यही शांतिपूर्ण और सफल जीवन का मार्ग है। 🙏 “धर्म के मार्ग पर किया गया निस्वार्थ कर्म ही मानव जीवन की सच्ची सफलता है।” #ShriKrishna #श्रीकृष्ण #KrishnaTeachings #भगवद्गीता #BhagavadGita #गीता_उप...

छोड़ने का अर्थ नफरत करना नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी अपेक्षाओं, नियंत्रण और भावनात्मक निर्भरता को समाप्त करना है।

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  जो लोग आपसे दूर जाना चाहते हैं, उन्हें जबरदस्ती रोकने, मनाने या बार-बार उनके पीछे जाने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें शांतिपूर्वक जाने दें और अपना ध्यान स्वयं के विकास व मानसिक शांति पर लगाएँ। छोड़ने का अर्थ नफरत करना नहीं , बल्कि उनसे जुड़ी अपेक्षाओं, नियंत्रण और भावनात्मक निर्भरता को समाप्त करना है। सार: “जो जाना चाहता है, उसे जाने दो। अपनी कीमत किसी दूसरे व्यक्ति के व्यवहार से मत आँको—अपने भीतर लौटो, आत्मसम्मान बचाओ और शांति से आगे बढ़ो। #QuietlyLetEveryoneGo #LetThemGo #SelfRespect #InnerPeace #EmotionalFreedom #MoveOn #SelfGrowth #HindiMotivation #LifeMotivation #OshoStyle #SpiritualWisdom #PositiveThinking #MentalPeace #आत्मसम्मान #मानसिकशांति #खुदपरध्यान #अपेक्षाओंसेमुक्ति #जीवनमेंआगेबढ़ें #AskSirji #RajendraDangwalSirji