GST में बड़ा बदलाव संभव: समूह कंपनियों के बीच ITC Transfer और Corporate Guarantee पर राहत की तैयारी (News)
भारत में GST व्यवस्था को अधिक सरल और व्यवसाय-अनुकूल बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है। समाचार रिपोर्ट के अनुसार, GST Council के अंतर्गत कार्यरत एक प्रमुख समिति उद्योग जगत की उस मांग पर चर्चा कर सकती है, जिसमें एक ही कॉरपोरेट समूह की कंपनियों के बीच अप्रयुक्त Input Tax Credit यानी ITC के Transfer की सुविधा देने की बात कही गई है।
इसके अतिरिक्त, समिति Intra-group Corporate Guarantee पर लगने वाले GST से छूट देने के प्रस्ताव की भी समीक्षा कर सकती है। हालांकि, अभी यह केवल विचाराधीन प्रस्ताव है और कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
वर्तमान GST व्यवस्था में क्या समस्या है?
कई कॉरपोरेट समूहों में एक कंपनी के पास बड़ी मात्रा में ITC जमा हो जाता है, लेकिन उसका पर्याप्त उपयोग नहीं हो पाता। दूसरी ओर, उसी समूह की किसी अन्य कंपनी को अपनी GST देनदारी का भुगतान नकद में करना पड़ता है।
उदाहरण के लिए, किसी समूह की एक कंपनी के Electronic Credit Ledger में अतिरिक्त ITC उपलब्ध है, जबकि उसी समूह की दूसरी कंपनी के पास पर्याप्त ITC नहीं है। वर्तमान व्यवस्था में सामान्यतः पहली कंपनी का ITC दूसरी स्वतंत्र कंपनी अपनी GST Liability के भुगतान में उपयोग नहीं कर सकती।
इससे निम्न समस्याएं पैदा होती हैं:
ITC का प्रभावी उपयोग नहीं हो पाता।
कंपनियों की Working Capital ब्लॉक होती है।
दूसरी कंपनी को GST का भुगतान नकद में करना पड़ता है।
समूह स्तर पर Tax Management कठिन हो जाता है।
Compliance Cost और विवाद बढ़ सकते हैं।
उद्योग जगत की मुख्य मांग क्या है?
उद्योग संगठनों ने सुझाव दिया है कि समान स्वामित्व, कॉरपोरेट समूह या समान PAN के अंतर्गत आने वाली पात्र इकाइयों के बीच अतिरिक्त ITC Transfer करने की व्यवस्था बनाई जाए।
यदि यह प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है, तो एक समूह की ऐसी इकाई जिसके पास अतिरिक्त ITC है, उसे निर्धारित शर्तों और सुरक्षा उपायों के अधीन दूसरी पात्र इकाई को Transfer कर सकेगी।
हालांकि, सरकार को Fake ITC, गलत Credit Transfer और Revenue Leakage रोकने के लिए स्पष्ट नियम बनाने होंगे।
प्रस्तावित व्यवस्था से क्या लाभ हो सकते हैं?
1. ITC का बेहतर उपयोग
समूह की एक इकाई में पड़ा हुआ अप्रयुक्त ITC दूसरी पात्र इकाई की GST देनदारी चुकाने में उपयोग किया जा सकेगा। इससे Credit का अधिक प्रभावी इस्तेमाल होगा।
2. Cash Flow में सुधार
जिन कंपनियों को अभी GST का भुगतान नकद में करना पड़ता है, उनकी Cash Outflow कम हो सकती है। इससे उपलब्ध धन का उपयोग Business Expansion, Investment और Operational Expenses में किया जा सकेगा।
3. Working Capital की बचत
अतिरिक्त ITC जमा रहने और दूसरी इकाई द्वारा Cash Tax Payment करने की स्थिति में समूह की Working Capital पर दोहरा प्रभाव पड़ता है। ITC Transfer की अनुमति मिलने से यह समस्या कम हो सकती है।
4. Litigation और Compliance Cost में कमी
स्पष्ट कानूनी व्यवस्था बनने से Group Companies के बीच GST Credit से जुड़े विवाद, विभागीय जांच और Compliance Burden कम हो सकते हैं।
5. Ease of Doing Business को बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव GST प्रणाली को अधिक व्यावहारिक और उद्योग-अनुकूल बना सकता है।
Intra-group Corporate Guarantee पर GST से राहत
समिति कॉरपोरेट समूह की कंपनियों के बीच दी जाने वाली Corporate Guarantee को GST से छूट देने की मांग पर भी विचार कर सकती है।
Corporate Guarantee सामान्यतः उस स्थिति में दी जाती है, जब Parent Company या Group Company किसी दूसरी समूह कंपनी के Loan या Financial Obligation के लिए बैंक अथवा वित्तीय संस्था को Guarantee देती है।
वर्तमान GST व्यवस्था में Related Parties के बीच बिना Consideration के की गई कुछ Supplies भी GST के दायरे में आ सकती हैं। इसी कारण Intra-group Corporate Guarantee के Valuation और Taxability को लेकर उद्योग जगत में लगातार विवाद और Compliance Challenges बने रहते हैं।
उद्योग का तर्क है कि समूह के भीतर दी जाने वाली Corporate Guarantee हमेशा वास्तविक Commercial Service या Revenue-generating Transaction नहीं होती। इसलिए ऐसी Guarantee को GST से छूट दी जानी चाहिए या उसके लिए सरल नियम बनाए जाने चाहिए।
किन विकल्पों पर विचार हो सकता है?
समाचार रिपोर्ट में विशेषज्ञों द्वारा दो संभावित व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है:
Canadian Model: निकट रूप से संबंधित समूह संस्थाओं के बीच की कुछ Supplies पर GST Charge न करने की अनुमति।
GST Credit Pooling: समूह की पात्र कंपनियों को अपने GST Credits एक Pool में रखने और आवश्यकता के अनुसार उनका उपयोग करने की सुविधा।
भारत में इनमें से किस मॉडल को अपनाया जाएगा, यह समिति और GST Council के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।
क्या प्रस्ताव लागू हो चुका है?
नहीं। यह प्रस्ताव अभी केवल विचाराधीन बताया गया है।
पहले GST Fitment Committee अथवा संबंधित समिति उद्योग के सुझावों की समीक्षा करेगी। इसके बाद स्वीकृत सिफारिशें GST Council के समक्ष रखी जा सकती हैं। अंतिम निर्णय GST Council की बैठक, आधिकारिक प्रेस रिलीज, Circular, Notification या GST Rules में संशोधन के बाद ही प्रभावी माना जाएगा।
इसलिए अभी कोई भी कंपनी अपने समूह की दूसरी कंपनी को ITC Transfer नहीं कर सकती, जब तक सरकार द्वारा स्पष्ट कानूनी प्रावधान जारी न किया जाए।
निष्कर्ष
यदि Group Companies के बीच ITC Transfer और Intra-group Corporate Guarantee पर GST राहत का प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो यह कॉरपोरेट सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार होगा। इससे ITC का बेहतर उपयोग, Cash Flow में सुधार, Working Capital की बचत और GST विवादों में कमी आ सकती है।
हालांकि, इसका लाभ तभी मिलेगा जब सरकार पात्र संस्थाओं, Transfer Limit, Documentation, Audit Trail और Anti-abuse Safeguards से संबंधित स्पष्ट नियम बनाएगी।
महत्वपूर्ण सूचना: यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्ट पर आधारित है। प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और इसे अंतिम GST कानून या सरकारी अधिसूचना न माना जाए।
Prepared By✍️ Rajendra Dangwal Sirji
Contact SMart Solutions & Services – Tally Certified Partner
📞 9522610100 | 9589129914
📧 smartouch.erp@gmail.com
🌐 AskSirji.com
"Compliance Made Easy. Business Made Smarter."
Comments
Post a Comment