PMEGP Scheme: ₹50 लाख तक का प्रोजेक्ट और 35% तक सब्सिडी—जानिए सही नियम
यदि आप अपना नया उद्योग या सेवा व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, लेकिन पूंजी की कमी आड़े आ रही है, तो प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम यानी PMEGP आपके लिए उपयोगी हो सकता है।
यह केंद्र सरकार की Credit-Linked Subsidy Scheme है, जिसे MSME मंत्रालय के अंतर्गत खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) लागू करता है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करके स्वरोजगार एवं रोजगार के अवसर पैदा करना है।
कितनी लागत तक का प्रोजेक्ट लगाया जा सकता है?
अखबार की हेडलाइन में ₹50 लाख तक कारोबार शुरू करने की बात कही गई है, लेकिन सही स्थिति यह है:
| उद्यम का प्रकार | सब्सिडी के लिए अधिकतम प्रोजेक्ट लागत |
|---|---|
| विनिर्माण या मैन्युफैक्चरिंग यूनिट | ₹50 लाख |
| सेवा या पात्र बिजनेस गतिविधि | ₹20 लाख |
इसलिए ₹50 लाख की सीमा सभी व्यवसायों पर लागू नहीं होती। यह मुख्यतः मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट के लिए है। MSME मंत्रालय की मई 2026 की आधिकारिक जानकारी
PMEGP में कितनी सब्सिडी मिलती है?
योजना में सब्सिडी आवेदक की श्रेणी और प्रोजेक्ट के स्थान पर निर्भर करती है।
| आवेदक की श्रेणी | अपना योगदान | शहरी क्षेत्र में सब्सिडी | ग्रामीण क्षेत्र में सब्सिडी |
|---|---|---|---|
| सामान्य वर्ग | 10% | 15% | 25% |
| विशेष वर्ग | 5% | 25% | 35% |
विशेष वर्ग में सामान्यतः SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक, महिलाएँ, पूर्व सैनिक, दिव्यांग, ट्रांसजेंडर, पूर्वोत्तर क्षेत्र, पहाड़ी एवं सीमावर्ती क्षेत्र तथा आकांक्षी जिलों के पात्र आवेदक शामिल होते हैं। आधिकारिक PMEGP सहायता विवरण
सब्सिडी की गणना कैसे होगी?
उदाहरण 1: सामान्य वर्ग का ग्रामीण प्रोजेक्ट
मान लीजिए किसी व्यक्ति ने ग्रामीण क्षेत्र में ₹20 लाख की फर्नीचर निर्माण यूनिट लगाने का प्रोजेक्ट बनाया।
कुल प्रोजेक्ट लागत: ₹20 लाख
स्वयं का योगदान 10%: ₹2 लाख
मार्जिन मनी सब्सिडी 25%: ₹5 लाख
शेष बैंक फाइनेंस: ₹13 लाख
उदाहरण 2: महिला का ग्रामीण प्रोजेक्ट
उसी ₹20 लाख के प्रोजेक्ट के लिए यदि आवेदक महिला है:
कुल प्रोजेक्ट लागत: ₹20 लाख
स्वयं का योगदान 5%: ₹1 लाख
मार्जिन मनी सब्सिडी 35%: ₹7 लाख
शेष बैंक फाइनेंस: ₹12 लाख
ये गणनाएँ अधिकतम पात्रता के आधार पर हैं। वास्तविक स्वीकृति बैंक द्वारा प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता, दस्तावेज, क्रेडिट मूल्यांकन और योजना की शर्तों के आधार पर की जाएगी।
क्या सब्सिडी सीधे बैंक खाते में मिलती है?
नहीं। PMEGP की सब्सिडी को Back-Ended Margin Money Subsidy कहा जाता है। इसका अर्थ है कि सब्सिडी की रकम आवेदक को शुरुआत में नकद नहीं दी जाती।
बैंक इसे निर्धारित खाते या TDR/SRF में रखता है। वर्तमान पोर्टल प्रक्रिया के अनुसार इसकी लॉक-इन अवधि सामान्यतः तीन वर्ष होती है। प्रोजेक्ट चालू रहने, ऋण खाते के संतोषजनक संचालन और भौतिक सत्यापन के बाद सब्सिडी को ऋण खाते में समायोजित किया जाता है। PMEGP का आधिकारिक बैंक मॉड्यूल
अर्थात इसे “तुरंत मिलने वाला मुफ्त पैसा” नहीं समझना चाहिए।
कौन आवेदन कर सकता है?
PMEGP के अंतर्गत नए उद्यम के लिए प्रमुख पात्रता शर्तें हैं:
आवेदक भारतीय नागरिक और 18 वर्ष से अधिक आयु का हो।
सहायता प्राप्त करने के लिए कोई आय-सीमा निर्धारित नहीं है।
योजना मुख्यतः नए और व्यवहार्य प्रोजेक्ट के लिए है।
₹10 लाख से अधिक के मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट और ₹5 लाख से अधिक के सेवा/बिजनेस प्रोजेक्ट के लिए कम-से-कम आठवीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है।
एक परिवार से केवल एक व्यक्ति सहायता प्राप्त कर सकता है। परिवार में आवेदक, पति या पत्नी और अविवाहित बच्चे शामिल होते हैं।
पहले से सरकारी सब्सिडी प्राप्त इकाई सामान्यतः नए प्रोजेक्ट की श्रेणी में दोबारा पात्र नहीं होती।
बिना Capital Expenditure वाले प्रोजेक्ट पात्र नहीं होते।
PMEGP की आधिकारिक पात्रता एवं FAQ
प्रोजेक्ट लागत में क्या शामिल किया जा सकता है?
प्रोजेक्ट लागत में मशीनरी, उपकरण, कार्यशील पूंजी और अन्य पात्र व्यावसायिक खर्च शामिल किए जा सकते हैं।
ध्यान रखें:
जमीन खरीदने की लागत प्रोजेक्ट लागत में शामिल नहीं की जा सकती।
तैयार शेड या लंबी अवधि के किराये/लीज वाले वर्कशेड का निर्धारित खर्च शामिल किया जा सकता है।
किराये या लीज की लागत अधिकतम तीन वर्ष की गणना तक सीमित हो सकती है।
प्रत्येक सामान्य Trading Activity स्वतः पात्र नहीं होती। व्यापारिक गतिविधियों पर अलग शर्तें और सीमाएँ लागू हैं।
नई इकाई का Udyam Registration भौतिक सत्यापन और सब्सिडी समायोजन से पहले अनिवार्य है।
आवेदन कैसे करें?
आवेदन आधिकारिक PMEGP e-Portal पर किया जा सकता है।
सामान्यतः निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:
आधार और पैन
पासपोर्ट आकार का फोटो
शैक्षणिक योग्यता प्रमाणपत्र
जाति या विशेष श्रेणी प्रमाणपत्र
ग्रामीण क्षेत्र प्रमाणपत्र, जहाँ लागू हो
विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी DPR
बैंक एवं पते से संबंधित दस्तावेज
EDP Training Certificate, जहाँ लागू हो
अन्य गतिविधि-विशेष लाइसेंस या प्रमाणपत्र
आवेदन के बाद संबंधित कार्यान्वयन एजेंसी और बैंक द्वारा जाँच की जाती है। बैंक प्रोजेक्ट की व्यावहारिकता, आवेदक की ऋण चुकाने की क्षमता, क्रेडिट रिपोर्ट और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर ऋण स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है।
क्या EDP Training जरूरी है?
PMEGP में Entrepreneurship Development Programme यानी EDP Training महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य आवेदक को व्यवसाय प्रबंधन, बैंकिंग, मार्केटिंग, लेखांकन और कानूनी अनुपालन की बुनियादी जानकारी देना है।
वर्तमान बैंक मॉड्यूल में ₹2 लाख से कम ऋण के मामलों में EDP विवरण वैकल्पिक बताया गया है। अन्य मामलों में लागू प्रशिक्षण संबंधी निर्देश पोर्टल और स्वीकृति पत्र के अनुसार पूरे करने चाहिए।
पुराने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए भी सहायता
अच्छा प्रदर्शन करने वाली मौजूदा PMEGP, REGP या MUDRA इकाई कुछ शर्तों के अंतर्गत अपग्रेडेशन के लिए दूसरा ऋण प्राप्त कर सकती है।
मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट: अधिकतम ₹1 करोड़
सेवा क्षेत्र: अधिकतम ₹25 लाख
सामान्य सब्सिडी: 15%
पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्य: 20%
इसके लिए पहली ऋण सुविधा का समय पर भुगतान, पिछले तीन वर्षों से लाभ में संचालन और Udyam Registration जैसी शर्तें लागू होती हैं।
योजना का प्रभाव
सरकार की मई 2026 की जानकारी के अनुसार FY 2021-22 से FY 2025-26 के दौरान:
5.8 लाख से अधिक प्रोजेक्ट स्थापित हुए।
₹60,000 करोड़ से अधिक बैंक ऋण स्वीकृत हुए।
₹13,450 करोड़ से अधिक मार्जिन मनी सब्सिडी दी गई।
लगभग 36.3 लाख रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए।
निष्कर्ष
PMEGP नया मैन्युफैक्चरिंग या सेवा उद्यम शुरू करने वालों के लिए उपयोगी योजना है। इसमें ₹50 लाख तक के मैन्युफैक्चरिंग और ₹20 लाख तक के सेवा प्रोजेक्ट पर 15% से 35% तक मार्जिन मनी सब्सिडी मिल सकती है।
लेकिन केवल आवेदन करने से ऋण या सब्सिडी की गारंटी नहीं मिलती। एक व्यावहारिक DPR, सही दस्तावेज, उचित स्वयं का योगदान, साफ क्रेडिट रिकॉर्ड और व्यवसाय चलाने की वास्तविक क्षमता सफलता के लिए जरूरी है।
सावधानी: आवेदन केवल आधिकारिक PMEGP पोर्टल से करें। किसी एजेंट द्वारा “गारंटीड लोन” या “पहले नकद सब्सिडी” देने के दावे से सावधान रहें।
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