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GST विवादों की समझ होगी आसान: GSTAT का पहला E-Journal, महत्वपूर्ण फैसलों तक डिजिटल पहुँच

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  GST विवादों की समझ होगी आसान: GSTAT का पहला ई-जर्नल, महत्वपूर्ण फैसलों तक डिजिटल पहुँच जीएसटी से जुड़े विवादों और न्यायिक निर्णयों को समझने वाले करदाताओं तथा टैक्स प्रोफेशनल्स के लिए GSTAT E-Journal का प्रथम खंड—Volume I एक उपयोगी संदर्भ सामग्री है। इसमें वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय अधिकरण (Goods and Services Tax Appellate Tribunal) के 31 अगस्त 2026 तक के निर्णयों की रिपोर्टिंग शामिल है। इस प्रकाशन के माध्यम से पाठक अधिकरण के फैसलों का अध्ययन कर सकते हैं और समझ सकते हैं कि संबंधित मामलों में तथ्यों तथा कानूनी प्रावधानों की व्याख्या किस प्रकार की गई है। आधिकारिक ई-जर्नल यहाँ पढ़ें। टैक्स प्रोफेशनल्स और कारोबारियों के लिए क्यों उपयोगी है यह ई-जर्नल? जीएसटी अनुपालन के साथ विवादों से जुड़े निर्णयों की जानकारी रखना भी महत्वपूर्ण है। किसी फैसले का अध्ययन संबंधित कानूनी प्रश्न, पक्षकारों के तर्क और अधिकरण के निष्कर्ष को समझने में सहायता करता है। यह ई-जर्नल विशेष रूप से इन पाठकों के लिए उपयोगी हो सकता है: चार्टर्ड अकाउंटेंट और टैक्स कंसल्टेंट: संबंधित निर्णयों के अध्ययन और पेशेवर शोध के...

PF Contribution for September 2026: Calculation for an Employee Earning ₹20,000 per Month

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PF Contribution for September 2026: Calculation for an Employee Earning ₹20,000 per Month September 2026 requires a split-period PF calculation because the statutory wage ceiling increased from ₹15,000 to ₹25,000 with effect from 17 September 2026 . For an employee earning ₹20,000 in monthly PF wages, the second period’s calculation uses their actual wages of ₹20,000. Source: Government announcement ₹20,000 is therefore the employee’s applicable monthly wage base in this example—not the revised statutory ceiling. This illustration assumes the employee was already a PF member, has 30 contributory days in September, and contributions were previously restricted to the statutory ceiling. It uses the standard 12% contribution rate for both employee and employer. Source: EPFO contribution rates How the September contribution is calculated Particulars 1–16 September 17–30 September Number of days 16 14 Applicable monthly PF wage base ₹15,000 ₹20,000 Prorated PF wages ₹15,000 × 16 ÷ 30 = ₹8,0...

पत्नी के गहनों पर पति की आय में जोड़ अनुचित: नागपुर ITAT ने दी राहत

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साझा घर में मिले आभूषणों का वास्तविक स्वामित्व पत्नी का हो, तो केवल बरामदगी के आधार पर उनका मूल्य पति की अघोषित आय में नहीं जोड़ा जा सकता। नागपुर आयकर अपीलीय अधिकरण ने निर्मल कुमार अग्रवाल बनाम ACIT , निर्धारण वर्ष 2017-18 में यह निर्णय दिया। तलाशी के बाद आकलन अधिकारी ने ₹50 लाख की आय वृद्धि की थी। प्रथम अपील में राहत मिलने के बावजूद चार आभूषणों से संबंधित ₹3,86,186 की वृद्धि कायम रही। ट्रिब्यूनल ने पाया कि इनमें ₹2,57,615 के आभूषण पत्नी के थे, जिन्हें उनके माता-पिता ने बेटियों के जन्म पर उपहार दिया था। पति द्वारा इनकी खरीद में निवेश का प्रमाण नहीं था। पति के आभूषणों में 72.6 ग्राम की खरीद बैंक और लेखा रिकॉर्ड से प्रमाणित थी। शेष 48.9 ग्राम पर पारिवारिक परंपराओं और CBDT निर्देश संख्या 1916 को ध्यान में रखते हुए राहत मिली। ट्रिब्यूनल ने हीरे जड़े होने या पुरुष के स्वामित्व में होने को आभूषण अस्वीकार करने का पर्याप्त आधार नहीं माना। पूरी ₹3,86,186 की वृद्धि हटा दी गई। इसी मामले में संशोधन से पहले हुई तलाशी पर धारा 115BBE की बढ़ी हुई 60% दर लगाने की चुनौती भी स्वीकार हुई। स्रोत: TaxGuru प...

गलतियों से सीखने की शुरुआत उन्हें स्वीकार करने से होती है

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  “गलतियों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है, बशर्ते उन्हें मानने से इनकार न करें।” जीवन में हम सभी से गलतियाँ होती हैं। कभी जल्दबाजी में लिया गया निर्णय परेशानी बढ़ा देता है, कभी बिना सोचे बोले गए शब्द किसी अपने को दुख पहुँचा देते हैं। हम चाहते हैं कि सब कुछ सही हो, लेकिन हमारी समझ और अनुभव की अपनी सीमाएँ होती हैं। ऐसे में आगे बढ़ने के लिए यह देखना जरूरी है कि गलती होने के बाद हम क्या करते हैं। अपनी गलती स्वीकार करना सुधार की पहली सीढ़ी है। जब तक हम यह मानने को तैयार नहीं होते कि हमसे कहीं चूक हुई है, तब तक उसे ठीक करने का रास्ता भी नहीं खोज पाते। गलती मानना इतना कठिन क्यों लगता है? अक्सर हमें डर होता है कि गलती स्वीकार करने से लोग हमें कमजोर या अयोग्य समझेंगे। इसलिए हम सफाई देने लगते हैं, परिस्थितियों को दोष देते हैं या जिम्मेदारी किसी दूसरे पर डाल देते हैं। इससे थोड़ी देर के लिए मन को राहत मिल सकती है, लेकिन समस्या बनी रहती है। “हाँ, यहाँ मुझसे गलती हुई” कहना साहस माँगता है। यह स्वीकार करने में विनम्रता भी है कि हमारी हर बात सही नहीं हो सकती और हमें अभी बहुत कुछ सीखना है। अनुभव तभी स...

EPFO की नई वेतन सीमा का आप पर क्या असर होगा?

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Tax Audit Due Date FY 2025-26 An extension is possible, but it is not confirmed yet.

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  An extension is possible, but it is not confirmed. Assuming you mean India’s FY 2025–26 (AY 2026–27) , as of 21 September 2026 , I could not find an official CBDT extension announcement. Current deadline: The usual tax-audit report deadline remains 30 September 2026 . Income Tax Department FAQ Requests for extension: CA associations have requested 31 October 2026 , citing utility updates, portal difficulties and overlapping compliance work. These are requests, not an approved extension. Representation dated 14 September My assessment: There are grounds for an extension, but insufficient evidence to call it likely or assign a reliable percentage. Continue preparing to file by 30 September , unless CBDT formally changes the date. For cases requiring a transfer-pricing report under section 92E, the normal tax-audit deadline is 31 October 2026. Official filing FAQs #TaxAudit #TaxAuditDueDate #TaxAuditExtension #DueDateExtension #FY202526 #AY202627 #CBDT #IncomeTaxIndia #Chartere...

एक बार और प्रयास: सफलता की ओर बढ़ता कदम

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जीवन में कई बार ऐसा होता है कि हम पूरी मेहनत करते हैं, फिर भी परिणाम हमारी उम्मीदों के अनुसार नहीं आते। परीक्षा में मनचाहे अंक नहीं मिलते, नौकरी की तलाश लंबी हो जाती है या व्यवसाय में अपेक्षित प्रगति नहीं होती। ऐसे समय में निराश होना स्वाभाविक है। लेकिन यही वह मोड़ है, जहाँ हमारा अगला निर्णय हमारी आगे की यात्रा को प्रभावित करता है। “सबसे बड़ी कमजोरी हार मानना है।” यह सुविचार हमें कठिन समय में अपने प्रयासों का मूल्य याद दिलाता है। एक असफल परिणाम हमारी पूरी क्षमता का आकलन नहीं कर सकता। उससे हमें यह समझने का अवसर मिलता है कि कहाँ तैयारी अधूरी थी, किस निर्णय में सुधार की जरूरत है और अगला कदम कैसे बेहतर बनाया जा सकता है। सफलता की दिशा में “एक बार और प्रयास” करने का अर्थ है—अपने अनुभव से सीखकर आगे बढ़ना। यदि कोई तरीका अपेक्षित परिणाम नहीं दे रहा है, तो उसकी समीक्षा करना उपयोगी है। कभी हमें अपनी योजना बदलनी होती है, कभी किसी अनुभवी व्यक्ति से सलाह लेनी होती है और कभी कोई नया कौशल सीखना पड़ता है। सोच-समझकर किया गया अगला प्रयास हमारी तैयारी को मजबूत बनाता है। मान लीजिए, किसी व्यक्ति ने एक छोटी ...

EPFO में बड़ा बदलाव: वेतन सीमा ₹25,000 हुई, आपकी नौकरी और PF पर क्या असर?

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नौकरीपेशा कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने वाला बड़ा बदलाव सामने आया है। EPFO के अंतर्गत अनिवार्य कवरेज की मासिक वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दी गई है। नई सीमा 17 सितंबर 2026 से प्रभावी बताई गई है। समाचार रिपोर्ट श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की साझा राजपत्र अधिसूचना S.O. 5109(E), दिनांक 17 सितंबर 2026 के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अध्याय III के लिए यह सीमा निर्धारित की गई है। अधिसूचना इसे राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से लागू करती है। इस बदलाव से EPFO के दायरे में आने वाले प्रतिष्ठानों में ₹15,000 से अधिक और ₹25,000 तक की पात्र मासिक wages वाले अधिक कर्मचारी अनिवार्य कवरेज में आ सकेंगे। उन्हें लागू पात्रता और योजना नियमों के अनुसार भविष्य निधि, पेंशन और बीमा सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा। कवरेज का विवरण कर्मचारियों को अपने HR या Accounts विभाग से PF पात्रता और वेतन से होने वाली कटौती समझनी चाहिए। नियोक्ताओं को कर्मचारियों की कवरेज, पंजीकरण और payroll गणना की समीक्षा करनी चाहिए। ध्यान दें: ₹25,000 की सीमा को सीधे CTC या हाथ में मिलने वाली सैलरी से न जोड़े...

EPFO की वेतन सीमा बढ़ी: कर्मचारियों को सुरक्षा, MSMEs के लिए बढ़ी जिम्मेदारी | EPFO सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000

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  केंद्रीय मंत्रिमंडल ने EPFO के अनिवार्य कवरेज की मासिक वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने को मंजूरी दी है। सरकार के अनुसार, इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की उम्मीद है। पीआईबी की घोषणा सरकारी घोषणा के मुताबिक, यह बदलाव 17 सितंबर 2026 से प्रभावी है। पात्र कर्मचारियों को लागू नियमों के अनुसार भविष्य निधि, पेंशन और बीमा योजनाओं का लाभ मिलेगा। इससे सेवानिवृत्ति के लिए बचत और परिवार की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय व्यावसायिक दृष्टि से देखें तो व्यापक कवरेज के कारण नियोक्ता अंशदान और वेतन प्रबंधन की लागत बढ़ सकती है। खासकर सीमित संसाधनों वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को नए पात्र कर्मचारियों का पंजीकरण, रिकॉर्ड अद्यतन और समय पर अंशदान जमा करने के लिए अतिरिक्त तैयारी करनी होगी। वास्तविक वित्तीय असर उनकी मौजूदा व्यवस्था और लागू नियमों पर निर्भर करेगा। कर्मचारियों के लिए भी दीर्घकालीन बचत के साथ तत्काल बजट का पहलू जुड़ा है—जहाँ नया या अधिक कर्मचारी अंशदान कटेगा, वहाँ हाथ में मिलने वाला वेतन घट सकत...

UPI Transaction Charges as per type of Transaction

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Tax Audit: Understanding the Shift from Penalty to Late Fee

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India’s tax audit framework is changing, and taxpayers need to distinguish between the rules for FY 2025–26 and those for Tax Year 2026–27 onwards. For FY 2025–26 (AY 2026–27) , tax audits continue under Section 44AB of the Income-tax Act, 1961 , using Form 3CA or 3CB along with Form 3CD. These requirements apply even when the report is filed after 1 April 2026. The image’s reference to “Section 444B” is a typographical error. Income Tax Department FAQs Failure to comply may attract a penalty under Section 271B of 0.5% of sales, turnover or gross receipts, capped at ₹1,50,000 . However, Section 273B provides relief where the taxpayer proves reasonable cause for the failure. Section 271B , Section 273B For Tax Year 2026–27 onwards , tax audits fall under Section 63 of the Income-tax Act, 2025 , with the consolidated Form No. 26 replacing the earlier forms. Official Form 26 FAQs Under Section 428(c) , the consequence becomes a fixed fee: ₹75,000 for a delay up to one month and ₹1,50,000...

UPI के नए नियम: 15 अक्टूबर से किन भुगतानों पर लगेगा 0.4% शुल्क?

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दुकान पर खरीदारी हो या परिवार को पैसे भेजना, यूपीआई से भुगतान करना रोजमर्रा की आदत बन चुका है। ऐसे में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर शुल्क लगने की खबर से सवाल उठना स्वाभाविक है। 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली व्यवस्था में चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लगेगा। ग्राहकों के लिए यूपीआई भुगतान मुफ्त रहेगा। NPCI की आधिकारिक जानकारी MDR वह शुल्क है जो व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए चुकाता है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, यह सरकार या NPCI द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है। इससे मिलने वाली राशि बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के बीच बाँटी जाएगी, ताकि यूपीआई की सेवाओं और ढाँचे को चलाने तथा विस्तार देने में मदद मिले। वित्त मंत्रालय का स्पष्टीकरण सामान्य MDR श्रेणी में आने वाले व्यापारियों के लिए ₹2,000 से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4% शुल्क तय किया गया है। प्रति लेनदेन इसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी। इसे उदाहरण से समझें: भुगतान की राशि व्यापारी पर लागू MDR ₹2,000 ₹0 ₹3,000 ₹12 ₹5,000 ₹20 ₹50,000 ₹200 ₹75,000 या अधिक अधिकतम ₹300 ये उदाहरण सामान्य दर वाले पात...

अपने लक्ष्य पर ध्यान दें: भटकाव के बीच आगे बढ़ने की कला

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  हम सभी के जीवन में कोई न कोई लक्ष्य होता है—पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करना, अपने काम में आगे बढ़ना, व्यवसाय शुरू करना या कोई नया कौशल सीखना। लेकिन रोजमर्रा की व्यस्तता, दूसरों की अपेक्षाएँ और बार-बार ध्यान खींचती सूचनाएँ हमें उस लक्ष्य से दूर ले जा सकती हैं। चित्र में निशाना साधता तीरंदाज एक सरल संदेश देता है: अपनी ऊर्जा उस दिशा में लगाएँ, जहाँ आप पहुँचना चाहते हैं। जैसे तीर चलाते समय लक्ष्य पर नजर टिकाना जरूरी है, वैसे ही जीवन में आगे बढ़ने के लिए अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट रखना आवश्यक है। स्पष्ट लक्ष्य से शुरुआत करें जब हमें पता होता है कि हम क्या हासिल करना चाहते हैं, तो अगला कदम चुनना आसान हो जाता है। “मुझे कुछ अच्छा करना है” एक इच्छा है। उसे काम करने योग्य लक्ष्य बनाने के लिए थोड़ा और स्पष्ट होना पड़ता है। उदाहरण के लिए, “मुझे बेहतर लिखना है” की जगह आप तय कर सकते हैं कि अगले एक महीने तक रोज 200 शब्द लिखेंगे और हर सप्ताह अपनी एक रचना सुधारेंगे। यह स्पष्टता आपको रोज यह समझने में मदद करती है कि कहाँ से शुरू करना है और अपनी प्रगति कैसे देखनी है। पहचानें कि आपका ध्यान कहाँ बँटता...

टैक्स ऑडिट 2026: बहीखातों, ऑडिट रिपोर्ट और नए आयकर कानून की सरल समझ | 100__FAQs_on_Tax_Audit_for_AY_2026_26-09-15

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  व्यवसाय या पेशे से होने वाली आय का सही हिसाब रखना कर अनुपालन का आधार है। आय, खर्च और कटौतियों का रिकॉर्ड व्यवस्थित होने से कर की गणना और रिपोर्टिंग में मदद मिलती है। टैक्स ऑडिट इसी लेखांकन और उससे जुड़े कर अनुपालन की जाँच की प्रक्रिया है। वर्ष 2026 में यह विषय विशेष रूप से प्रासंगिक है, क्योंकि आयकर अधिनियम, 2025 लागू होने के साथ पुराने और नए कर वर्षों के लिए लागू प्रावधानों को समझना जरूरी हो गया है। बहीखाते रखना और टैक्स ऑडिट कराना आयकर अधिनियम, 1961 में इन दोनों जिम्मेदारियों के लिए अलग प्रावधान हैं: धारा 44AA: बहीखाते और आवश्यक लेखा दस्तावेज रखने से संबंधित है। धारा 44AB: निर्धारित परिस्थितियों में खातों का टैक्स ऑडिट कराने से संबंधित है। इनकी लागू होने की शर्तें अलग-अलग हैं। कारोबार या पेशे की प्रकृति, आय, टर्नओवर, सकल प्राप्तियों और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर दायित्व तय होता है। इसलिए बहीखाते रखने की अनिवार्यता का अर्थ हर मामले में टैक्स ऑडिट की अनिवार्यता नहीं होता। स्रोत: आयकर विभाग टैक्स ऑडिट का उद्देश्य क्या है? टैक्स ऑडिट का उद्देश्य खातों की शुद्धता और कर स...

हर बहस जीतना ज़रूरी नहीं | “मूर्ख से बहस करने पर मूर्खों की संख्या दो हो जाती है।”

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  हर बहस जीतना ज़रूरी नहीं कभी ऐसा हुआ है कि किसी को अपनी बात समझाते-समझाते आपका मन अशांत हो गया हो? आपने तर्क दिए, उदाहरण रखे और सामने वाले की शंकाओं का उत्तर भी दिया, लेकिन बातचीत वहीं घूमती रही। कुछ देर बाद विषय पीछे छूट गया और सवाल बस इतना रह गया—आखिरी बात कौन कहेगा? चित्र में लिखा संदेश इसी स्थिति पर चोट करता है: “मूर्ख से बहस करने पर मूर्खों की संख्या दो हो जाती है।” यह कथन हमें अपनी प्रतिक्रियाओं पर विचार करने का अवसर देता है। जब किसी बातचीत में सुनने, समझने और अपनी गलती स्वीकार करने की गुंजाइश समाप्त हो जाए, तब उसमें उलझे रहकर हम भी अपना विवेक खो सकते हैं। चित्र में आमने-सामने रखे दो ध्वनि-विस्तारक दिखाई देते हैं। उनके बीच आवाज़ की तरंगें उलझ रही हैं और नीचे टूटे हुए घड़े बिखरे पड़े हैं। इसे संवाद के बिगड़ने के एक रूपक की तरह देखा जा सकता है। दोनों पक्ष अपनी आवाज़ दूसरे तक पहुँचाना चाहते हैं, लेकिन सुनने के लिए कोई ठहरता नहीं। उलझी तरंगें बढ़ती गलतफहमी और टूटे घड़े रिश्तों, भरोसे तथा सम्मान को पहुँचने वाली चोट का संकेत लगते हैं। हमारे जीवन की कई बहसें भी ऐसा ही रूप ले लेती...

डॉ. भीमराव आंबेडकर | महात्मा गांधी | नेताजी सुभाष चंद्र बोस - की प्रमुख भूमिका (योगदान ) नव भारत के निर्माण में

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  डॉ. भीमराव आंबेडकर का भारत के निर्माण में बहुत बड़ा योगदान था। उनकी प्रमुख भूमिका सामाजिक समानता, दलितों के अधिकार और लोकतांत्रिक संविधान बनाने में थी। गांधीजी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस से तुलना करते समय उनके संघर्ष के अलग तरीकों को समझना ज़रूरी है। नेता प्रमुख भूमिका महात्मा गांधी अहिंसक जनांदोलनों से ब्रिटिश शासन को चुनौती दी — जैसे नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन। स्रोत नेताजी सुभाष चंद्र बोस आज़ाद हिंद फ़ौज का नेतृत्व करके ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष को आगे बढ़ाया। स्रोत डॉ . आंबेडकर जातिगत भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष किया , वंचित लोगों के राजनीतिक अधिकारों की माँग की और स्वतंत्र भारत के संविधान निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाई। स्रोत आंबेडकर के योगदान को इन उदाहरणों से समझ सकते हैं: सामाजिक आज़ादी के लिए संघर्ष: उनका मानना था कि राजनीतिक लोकतंत्र को सफल बनाने के लिए समाज में...

BE SOMEONE WHO NEVER STOPS LEARNING.

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Depreciation Rate Chart For FY 2025-26 | AY 2026-27 : आयकर में मूल्यह्रास की दरें और सही क्लेम की जानकारी

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Depreciation Rate Chart: आयकर में मूल्यह्रास की दरें और सही क्लेम की जानकारी व्यापार या प्रोफेशन में इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटर, मशीनरी, वाहन और फर्नीचर जैसी संपत्तियाँ समय और उपयोग के साथ पुरानी होती हैं। आयकर में पात्र संपत्तियों पर निर्धारित नियमों के अनुसार मिलने वाली कटौती को मूल्यह्रास (Depreciation) कहते हैं। सही दर और सही गणना से व्यवसाय की कर-योग्य आय निर्धारित करने में मदद मिलती है। आयकर अधिनियम — धारा 32 वित्त वर्ष का ध्यान रखें: यह लेख FY 2025–26 यानी AY 2026–27 के संदर्भ में है, जिस पर आयकर अधिनियम, 1961 लागू है। 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले Tax Year 2026–27 पर आयकर अधिनियम, 2025 लागू होता है। इसलिए चित्र में लिखे “FY 2025–26 onwards” को सभी आगामी वर्षों के लिए पुराने अधिनियम का संदर्भ न समझें। आयकर विभाग का स्पष्टीकरण आयकर नियमों की दर-सारणी में प्रमुख संपत्तियों के लिए निम्न सामान्य दरें दी गई हैं। आधिकारिक मूल्यह्रास दर-सारणी संपत्ति / ब्लॉक वार्षिक मूल्यह्रास दर मुख्यतः आवासीय उपयोग वाले भवन , होटल और बोर...

GST LITIGATION | GSTR-1 vs GSTR-3B

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GST LITIGATION | GSTR-1 vs GSTR-3B Can a GST demand be raised merely because GSTR-1 and GSTR-3B do not match? A mismatch is a starting point for verification not necessarily proof of tax evasion. Before confirming a demand, the actual reason for the difference must be established. It may arise from amendment of invoices, credit notes, reporting in a different tax period, timing differences or genuine clerical errors. Before accepting a mismatch-based demand, reconcile: GSTR-1 → GSTR-3B → Books → Tax Invoices → E-invoices → E-way Bills → Tax Payment The officer should examine the underlying transactions, rather than treating a system-generated difference as conclusive evidence of short payment. If fraud or suppression is alleged, the Department must also establish the statutory ingredients and supporting facts required for invoking the applicable provision. A GST mismatch deserves an explanation but a mismatch by itself should not become the conclusion. #GST #GSTLitigation #GSTR1 #GSTR3...

सुविचार [ 08-09-2026 ] : कुछ करना हो तो रास्ता खोजिए, वरना बहाने तो मिल ही जाएंगे।

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  सुविचार कुछ करना हो तो रास्ता खोजिए, वरना बहाने तो मिल ही जाएंगे। #सुविचार #आजकासुविचार #प्रेरणा #सकारात्मकसोच #बहानेछोड़ो #आगेबढ़ो #HindiQuotes #DailyMotivation #TakeAction #NoExcuses #SuccessMindset #RajendraDangwalSirji #AskSirji